
बस्ती: 14 वर्षीय किशोर को पुलिस ने किया प्रताड़ित, डरकर सरयू नदी में कूदा, थानाध्यक्ष पर लगे गंभीर आरोप
थानाध्यक्ष छावनी की कार्यशैली पर सवाल: नाबालिग को धमकाने और नदी में डूबने देने का गंभीर आरोप छावनी पुलिस पर फिर उठे सवाल: भैंस खोजने निकले किशोर को पीटा, गुप्तांग में पेट्रोल डालने की धमकी देने का आरोप
बस्ती: छावनी थानाध्यक्ष पर नाबालिग को प्रताड़ित करने और लापरवाही के गंभीर आरोप
- बस्ती: थानाध्यक्ष छावनी के खिलाफ सीएम से शिकायत, किशोर की प्रताड़ना का मामला गरमाया
बस्ती। जनपद के छावनी थाना क्षेत्र में एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला प्रकाश में आया है। थाना क्षेत्र के छौतौना निवासी शिवजगत निषाद ने मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र लिखकर छावनी थानाध्यक्ष राणा डी.पी. सिंह पर अपने 14 वर्षीय पुत्र को बेवजह प्रताड़ित करने और उसके डूबने पर मूकदर्शक बने रहने का आरोप लगाया है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित पिता शिवजगत निषाद द्वारा दी गई तहरीर के अनुसार, घटना 1 जुलाई 2026 की है। उनका 14 वर्षीय पुत्र अमरनाथ निषाद अपनी भैंस खोजने के लिए मोटर साइकिल से छौतौना माझा क्षेत्र में गया था। आरोप है कि उसी समय थानाध्यक्ष छावनी अपनी टीम के साथ शराब के खिलाफ अभियान चला रहे थे।
प्रताड़ना और नदी में कूदने का आरोप
तहरीर में आरोप लगाया गया है कि थानाध्यक्ष राणा डी.पी. सिंह के निर्देश पर एक कथित चौकीदार दुर्गेश शुक्ला और तीन-चार अज्ञात सिपाहियों ने नाबालिग को पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान जब किशोर ने बताया कि वह भैंस खोज रहा है, तो पुलिसकर्मियों ने उसकी पिटाई की और उसका पैंट उतरवा दिया। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस ने उसे गुप्तांग में पेट्रोल डालने की धमकी देकर शराब बनाने की बात स्वीकार करने का दबाव बनाया।
अत्यधिक दहशत में आकर किशोर पास ही बह रही सरयू नदी में कूद गया। पिता का दावा है कि तेज बहाव के कारण जब उसका पुत्र डूबने लगा और उसने शोर मचाया, तब भी थानाध्यक्ष और मौके पर मौजूद सिपाहियों ने उसे बचाने का कोई प्रयास नहीं किया। वे केवल तमाशबीन बने रहे, जबकि नदी में घड़ियाल होने के डर से स्थानीय लोग भी पानी में उतरने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
न्याय की गुहार
इस घटना से क्षेत्र में भारी आक्रोश है। पीड़ित पिता ने मुख्यमंत्री से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी थानाध्यक्ष और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
नोट: यह लेख केवल उपलब्ध कराए गए शिकायती पत्र के तथ्यों पर आधारित है।

















